घन्यवाद
दोस्तों "मनुस्य का जीवन अन्य सभी जीवन से श्रेस्ट होता है"। स्वाभाविक है कि हमारे श्रेस्ट मानव जीवन का लक्ष्य भी उतना ही श्रेस्ट होगा जितना कि हमारा मानव जीवन।उसी लक्ष्य को प्राप्त कर जीवन को सार्थक बनाने कि चाह प्रत्येक मनुष्य को होती है।हम उसी लक्ष्य के पीछे सार्थक जीवन और निरर्थक जीवन के भय के बीच अपने जीवन को जीते चले जाते हैं।भयवश हम जीवन के अनेक शार्टकट मार्ग अपनाते हैं।परंतु हम फिरभी भयभीत बने रहते हैं।लक्ष्य तो दूर जीवनभर हम उस भय से मुक्त होने का मार्ग ही नही खोज पाते हैं।हम मानव जीवन की श्रेष्टता के अर्थ को भूलकर मानव जीवन को कठिन मानने लग जाते हैं। क्या हमारा मानव जीवन कठिन है ?या-क्या हम वास्तव में मानव जीवन को समझ हि नही पाए? मानव जीवन की श्रेष्टता हमें मानव जीवन के परम आनंद का एहसास करने वाली है।इस प्रकार हमारा मानव जीवन सरल व स्वाभाविक होना सुनिश्चित है।पर हां हम वास्तव में मानव जीवन को नहीं समझ पाए हैं।क्योंकि हम जीवनभर शार्टकट द्वारा मात्र मानव जीवन को समझने का प्रयत्न करते रहे जो अपने आप में पूर्ण नही है। हमें दूसरे प्रश्न केअनुसार वास्तव में मानव जीवन अर्थात मानव जीवन की वास्तविकता को समझने की कोशिश करना चाहिए। इसप्रकार दोस्तों हम जबतक अपने लक्ष्य की वास्तविक्ता(reality)को नही समझेेगे'तब तक हमारा किसी भी कार्य या जीवन के किसी भी पहलू में सफलता हाशिल करना मुुमकीन नही होगा। - अब दोस्तों पहले पोस्ट से विदा लेेता हुुु अगले पोस्ट मेंं वास्तविक्ता की परिभाषा व मानव जीवन में इसके महत्व पर र्चचा करेगें।
वास्तविकता का अर्थ ,हमारे मानव जीवन में वास्तविकता का महत्व,हमारे मानव जीवन की अनेक वास्तविकताओं से हमारा परिचय ,मानव जीवन में सफलता की कुंजी ।
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